आम है यार की तजल्ली 'मीर' — मीर तक़ी मीर

आम है यार की तजल्ली 'मीर' ख़ास मूसा व कोह-ए-तूर नहीं

“The manifestation of the beloved is like a mango, Mir, Not like Moses or the Mount of Tur.”

— मीर तक़ी मीर

अर्थ

मीर कहते हैं कि मेरे यार की तजल्ली आम है, वह न तो मूसा हैं और न ही कोह-ए-तूर।

विस्तार

यह शेर उस खूबसूरती को बयां करता है जो इतनी स्वाभाविक और सहज होती है कि उसे किसी चमत्कार से तुलना करने की ज़रूरत नहीं पड़ती। शायर कह रहे हैं कि महबूब की तजल्ली (दिव्य आभा) इतनी आम है, कि उसे मूसा या कोह-ए-तूर जैसे किसी बड़े, अलौकिक उदाहरण से साबित करने की क्या ज़रूरत। यह खूबसूरती अपने आप में पूर्ण है!

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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