दश्त के फूटे मक़बरों पे न जा — मीर तक़ी मीर
दश्त के फूटे मक़बरों पे न जा
रौज़े सब गुलसिताँ होते हैं
“Do not go to the broken tombs in the wilderness; all shrines are gardens.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
रेगिस्तान के टूटे मकबरों पर मत जाना; सभी मज़ार बाग़ होते हैं।
विस्तार
यह शेर हमें ज़िंदगी के गहरे सच से मिलाता है। शायर कह रहे हैं कि आप दश्त के टूटे-फूटे मक़बरों की तरफ़ न जाएं। क्यों? क्योंकि शायर हमें याद दिलाते हैं कि हर क़ब्र, चाहे वो कितनी भी टूटी क्यों न हो, असल में एक गुलसिताँ होती है। यह एक बहुत ख़ूबसूरत तसव्वुर है... कि हर उदासी में भी एक तरह की ख़ूबसूरती छिपी होती है।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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