ग़ैरों ही के सुख़न की तरफ़ गोश-ए-यार थे — मीर तक़ी मीर
ग़ैरों ही के सुख़न की तरफ़ गोश-ए-यार थे
इस हर्फ़-ए-ना-शिनो ने हमारी न मानियां
“To the whispers of strangers, my beloved's ear was inclined; But this letter of 'Na' and 'Shin' did not heed our plea.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
ग़ैरों के सुख़न की तरफ़ प्रिय की कानों का झुकाव था, पर 'न-श' के इस अक्षर ने हमारी बात नहीं मानी।
विस्तार
इस शेर में शायर ने इश्क़ के सबसे गहरे दर्द को बयां किया है। वह कहते हैं कि मेरे महबूब का ध्यान हमेशा ग़ैरों की बातों और बातों में लगा रहता है। मैं तो इतना टूट चुका हूँ कि मेरा कोई भी ज़िक्र, कोई भी पुकार... वह सुनता ही नहीं। यह महज़ इग्नोरेंस नहीं है, यह दिल का बेरुखापन है।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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