हम से तो कीने ही की अदाएँ चली गईं — मीर तक़ी मीर
हम से तो कीने ही की अदाएँ चली गईं
बे-लुत्फ़ियाँ यही यही ना-मेहरबानियाँ
“From us, countless charms and airs have departed, These cruel neglects, these undeserved graces.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
हमसे तो अनगिनत अदाएँ चली गईं, ये बे-लतफ़ियाँ और यही ना-मेहरबानियाँ।
विस्तार
यह शेर दिल की गहराई से निकली हुई शिकायत है। शायर कहते हैं कि उनसे तो उनकी सारी नज़ाकत, उनकी सारी अदाएँ छिन गई हैं। और यह क्यों हुआ? क्योंकि उन्हें कहीं से कोई सहजता नहीं मिली, कोई मेहरबानी नहीं मिली। यह उस दर्द को बयां करता है जब बार-बार उपेक्षा सहने से इंसान खुद को खोने लगता है। एक बहुत ही उदास और गहरा एहसास है!
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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