क्या आग दे के तौर को की तर्क सर-कशी — मीर तक़ी मीर
क्या आग दे के तौर को की तर्क सर-कशी
उस शो'ले की वही हैं शरारत की बानीयाँ
“What fire has given the form of logic and reasoning? Those are the verses of mischief of that flame.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
किस आग ने तर्क और स्वरूप को दिया है? वे तो उस ज्वाला की शरारत भरी बातें हैं।
विस्तार
यह शेर उस चीज़ की बात करता है जो स्वभाव से ही बेकाबू होती है। शायर पूछते हैं कि क्या आप आग को तर्क या समझदारी से रोक सकते हैं? जवाब बहुत गहरा है—नहीं। क्योंकि वह शो'ला.... वह तो शरारत की निशानी है। इसका स्वभाव ही ऐसा है कि आप इसे कितना भी काबू करने की कोशिश करें, यह हमेशा अपनी मस्ती में ही रहेगा।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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