तिरा है वहम कि ये ना-तवाँ है जामे में — मीर तक़ी मीर

तिरा है वहम कि ये ना-तवाँ है जामे में वगर्ना मैं नहीं अब इक ख़याल अपना हूँ

“It is an illusion that this is what I am in my state, Otherwise, I am no longer merely a thought of my own.”

— मीर तक़ी मीर

अर्थ

तेरा वहम कि ये ना-तवाँ है जामे में, वरना मैं नहीं अब इक ख़याल अपना हूँ।

विस्तार

यह शेर एक बहुत गहरी बात कह रहा है। शायर कह रहे हैं कि जो भी कमज़ोरी या कमी आपको दिखाई देती है, वो असल में सिर्फ आपकी अपनी कल्पना है। वो कहते हैं कि अब वो किसी की नज़रों या किसी के अहकाम से बंधे नहीं हैं। उन्होंने खुद को ढूंढ लिया है, अपनी एक अलग पहचान पा ली है। ये इक्तिराज-ए-दिल, ये अपनी सोच में जीना, ही ज़िंदगी है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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