अगरचे नश्शा हूँ सब में ख़ुम-ए-जहाँ में लेक — मीर तक़ी मीर

अगरचे नश्शा हूँ सब में ख़ुम-ए-जहाँ में लेक ब-रंग-ए-मय अरक़-ए-इंफ़िआ'ल अपना हूँ

“Though I am intoxicated in the wine of the world, I am mine in the wine of my own passion.”

— मीर तक़ी मीर

अर्थ

हालांकि मैं दुनिया के नशे में हूँ, पर मैं अपने जुनून की शराब में अपना हूँ।

विस्तार

यह शेर आत्म-निर्भरता की बात करता है। मिर्ज़ा तक़ी मीर कहते हैं कि भले ही मैं दुनिया के नशे में डूबा हूँ, लेकिन मेरा असली नशा तो मुझमें ही है। मेरा रंग, मेरा मय, और मेरे एहसास का मदहोशी... यह सब सिर्फ़ मेरा है। यह एक ऐलान है कि सच्चा जुनून बाहरी नहीं, बल्कि आंतरिक होता है।

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