सरिश्क-ए-सुर्ख़ को जाता हूँ जो पिए हर-दम — मीर तक़ी मीर
“To the crimson draught, which I drink eternally, I am the own of the continuous connection's blood.”
अर्थ
जो हरदम सुर्ख़ (लाल) रंग का पेय पीता है, वह मैं हूँ। मैं निरंतर जुड़ाव के रक्त का अपना हूँ।
विस्तार
यह शेर इश्क़ के उस नशे को बयान करता है, जहाँ प्रेमी अपनी जान को भी सर्वस्व मान लेता है। शायर कह रहे हैं कि वह उस लालिमा की तरफ जाएगा जो महबूब हर पल पीती रहती है। और ये आखिरी मिसरा देखिए—'लहू का प्यासा अलल-इत्तिसाल अपना हूँ'—इसका मतलब है कि मैं ही उस रिश्ते की प्यास हूँ, जो खून की तरह गहरा है। यह वफ़ा और जुनून का बेहतरीन संगम है।
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