जो बे-अख़्तियारी यही है तो क़ासिद — मीर तक़ी मीर

जो बे-अख़्तियारी यही है तो क़ासिद हमीं आ के उस के क़दम देखते हैं

“If this is the state of being without power, then the lover comes and sees those feet.”

— मीर तक़ी मीर

अर्थ

जो बे-अख़्तियारी की स्थिति है, तो आशिक़ (प्रेमी) का क़ासिद (प्रेमी) ही उसके क़दमों को देखने आता है।

विस्तार

यह शेर, मिर्ज़ा तक़ी मीर साहब का है, जो आशिक़ के गहरे समर्पण को दर्शाता है। शायर कहते हैं कि अगर बे-अख़्तियारी (लापरवाही) ही उसकी आदत है, तो भी मैं क़ासिद बनकर उसके क़दमों को देखता रहूँगा। यह एक अटूट वफ़ादारी का ऐलान है—कि मैं उसके पीछे कहीं भी चलूँगा, रास्ता कितना भी मुश्किल क्यों न हो। मीर साहब ने बेमिसाल तरीके से निस्वार्थ प्रेम और समर्पण को बयान किया है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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