तिनका नहीं रहा है क्या अब निसार करिए
आगे ही हम तो घर को जारूब कर चुके हैं
“Has the fine straw (of our life) run out now? Please bestow (us) some more. We have already scattered our home (with our deeds).”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
क्या हमारे जीवन का थोड़ा सा तिनका भी नहीं बचा है? क्या आप हमें थोड़ा और दे सकते हैं? हमने तो अपने घर को पहले ही जारूब (राख) में मिला दिया है।
विस्तार
यह शेर उस वक़्त की बात करता है जब इंसान ने अपना हर एक कतरा, अपनी हर चीज़, किसी और के नाम कर दी होती है। शायर एक सवाल पूछ रहे हैं—क्या अब तिनका भी नहीं बचा? और जवाब में एक गहरी उदासी है—हमारा तो पूरा घर ही धूल में मिल चुका है। यह शेर निस्वार्थ बलिदान और तन्हाई का एहसास कराता है।
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