आसूदा क्यूँके हूँ मैं कि मानिंद-ए-गर्द-बाद आवारगी तमाम है मेरी सरिश्त में

“Why am I so innocent, like a fluttering bird, For my very existence is a wandering journey.”

— मीर तक़ी मीर
अर्थ

मैं किसलिए भोला हूँ, जैसे एक उड़ता हुआ पक्षी, क्योंकि मेरा पूरा अस्तित्व ही एक भटकन है।

विस्तार

यह शेर एक ऐसे मन की बात कहता है जो हमेशा भटकता रहता है। शायर कहते हैं कि मैं इतना बेपरवाह क्यों हूँ? इसका जवाब देते हुए वह कहते हैं कि मेरी पूरी ज़िंदगी में ही आवारगी समाई हुई है। मतलब, उनका बेपरवाह होना कोई आदत नहीं, बल्कि उनका स्वभाव है। यह एक गहरे, अनियंत्रित सफ़र को दर्शाता है।

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आसूदा क्यूँके हूँ मैं कि मानिंद-ए-गर्द-बाद | Sukhan AI