जीते हैं तो दिखा देंगे दावा-ए-अंदलीब
गुल बिन ख़िज़ाँ में अब के वो रहती है मर कि हम
“If we live, we will show the claim of the garden-like beauty; for now, the flower remains in the autumn, and we are dead.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
अगर हम जीवित रहे, तो अपनी बाग़ जैसी सुंदरता का दावा दिखा देंगे; लेकिन अभी तो फूल पतझड़ में है, और हम मर चुके हैं।
विस्तार
यह शेर एक बहुत गहरी उलझन को दर्शाता है। पहले मिसरे में शायर एक तरह का हौसला दिखा रहे हैं—कि हम तो ज़िंदा हैं, हमें अपनी पहचान साबित करनी है। लेकिन दूसरे मिसरे में वो कहते हैं कि यह सब हौसला किस पर टिका है? अगर जीवन का मूल रंग, या वो खूबसूरती (ख़िज़ाँ), ही चली गई... तो ज़िंदा रहना भी एक सज़ा बन जाता है। यह एहसास है कि जीवन सिर्फ़ दिखावे का नाम नहीं है।
Comments
Read-only on web. Join the conversation in the Sukhan AI mobile app.
No comments yet.
