ख़ुर्शीद सुब्ह निकले है इस नूर से कि तो
शबनम गिरह में रखती है ये चश्म-ए-तर कि हम
“O sunshine, you have risen with such radiance, that This eye, moist with tears, holds it like morning dew.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
हे सूरज, तुम इस चमक से निकले हो कि यह आंसू भरी आँख इसे ओस की बूंद में रखती है।
विस्तार
यह शेर नज़ारा और एहसास, दोनों का कमाल है। शायर कहते हैं कि सुबह की रौशनी इतनी तेज़ और इतनी खूबसूरत है कि वो हमारे आँसुओं को भी... एक ओस की बूँद में समेट लेती है। यह बस एक उपमा नहीं है; यह बताती है कि जब कोई चीज़ बहुत ज़्यादा ख़ूबसूरत होती है, तो हमारे सारे गम, सारे आँसू भी उसके नूर में समा जाते हैं।
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