“For the splendor of Islam, some disbelief is needed, It is the beauty of the prayer beads of Solomon.”
कुफ़्र (नास्तिकता) इस्लाम की रौनक के लिए कुछ चाहिए, और यह सुलैमान के तस्बीह (माला) का हुस्न (सौंदर्य) है।
यह शेर न सिर्फ़ भक्ति, बल्कि दिखावे और सच्चाई के बीच का फ़र्क़ बताता है। शायर कहते हैं कि किसी बड़ी रौनक़ के लिए तो शायद थोड़ा सा 'कुफ़्र' (अविश्वास का नाटक) ज़रूरी हो। लेकिन असली सुंदरता.... असली नूर तो उस तस्बीह में है जो मन से निकलती है, जो सुलैमान की माला की तरह निश्छल होती है। यह दिखाता है कि दिखावे से ज़्यादा ज़रूरी, दिल की नीयत होती है।
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