तेरे क़ैद-ए-क़फ़स का क्या शिकवा
नाले अपने से अपने से फ़रियाद
“What complaint can be made of the captivity of the cage? The streams themselves cry out to themselves.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
तेरे क़ैद-ए-क़फ़स का क्या शिकवा, नाले अपने से अपने से फ़रियाद। इसका शाब्दिक अर्थ है कि पिंजरे की कैद का क्या शिकायत करना, जब नदियाँ खुद से ही शिकायत कर रही हैं।
विस्तार
यह शेर बहुत गहरा है। मिर्ज़ा तक़ी मीर कहते हैं कि अगर आपको अपने क़ैद होने का शिकवा है, तो यह शिकवा कहीं बाहर से नहीं आ रहा। यह फ़रियाद तो आपके अपने नाले से आ रही है। इसका मतलब है कि आपकी परेशानी किसी बाहरी चीज़ में नहीं, बल्कि आपके अपने मन की बेचैनी में है। यह आत्म-चिंतन का एक बेहतरीन उदाहरण है।
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