हर तरफ़ हैं असीर हम-आवाज़
बाग़ है घर तिरा तो ऐ सय्याद
“Everywhere we are captive to your voice, Your garden is your home, oh Sayyad.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
हर जगह हम तुम्हारी आवाज़ के क़ैदी हैं, ऐ सय्याद, और तुम्हारा बाग़ ही तुम्हारा घर है।
विस्तार
यह शेर मोहब्बत के उस नशा को बयान करता है, जहाँ वस्ल (मिलन) ही ज़िंदगी बन जाता है। शायर कह रहे हैं कि मेरी आवाज़, मेरा वजूद... सब हर तरफ़ क़ैद है। क्यों? क्योंकि जिस महबूब का बाग़ है, वही मेरा घर है। यानी, महबूब की मौजूदगी ने पूरी दुनिया को मेरे लिए एक ही जगह बना दिया है। यह समर्पण का बेहतरीन नज़ारा है।
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