भूला जाए है ग़म-ए-बुताँ में जी
ग़रज़ आता है फिर ख़ुदा ही याद
“In the sorrow of forgetfulness, one lives, But when the need arises, only God is remembered.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
भूलने के गम में जीया जाता है, लेकिन जब ज़रूरत पड़ती है, तो केवल ख़ुदा को याद किया जाता है।
विस्तार
यह शेर इंसान के दिल की सच्चाई को बयां करता है। शायर कहते हैं कि दुनिया के गम में इंसान चाहे कितना भी डूब जाए, फिर भी जब असली ज़रूरत पड़ती है, तो याद आने वाला कोई और नहीं होता। यह एहसास है कि दुनिया का सारा दर्द भी, खुदा की याद के सामने फीका पड़ जाता है। यह एक गहरा और बहुत ही सच्चा फ़लसफ़ा है।
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पाठ
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