ख़ाक भी सर पे डालने को नहीं
किस ख़राबे में हम हुए आबाद
“Even dust cannot be found upon my head, In what ruin have we settled and prospered?”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
मेरे सिर पर तो धूल भी नहीं है, किस बर्बादी में हम बस गए और समृद्ध हुए।
विस्तार
यह शेर बहुत गहरा दर्द बयान करता है। मिर्ज़ा तक़ी मीर कह रहे हैं कि उनका दर्द इतना बड़ा है कि उस पर तो बस धूल भी नहीं पड़ रही। वह सवाल कर रहे हैं कि किस तरह वे लोग इस ख़राबी, इस तबाही के बीच में, किसी तरह आबाद हो गए। यह एक ऐसी निराशा है, जहाँ सुकून और तबाही का मिल जाना एक बड़ा सवाल बन जाता है।
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