फ़िक्र-ए-ता'मीर' में न रह मुनइम ज़िंदगानी की कुछ भी है बुनियाद

“In the worry of rebuilding, do not remain hesitant; life's existence has some foundation.”

— मीर तक़ी मीर
अर्थ

मरम्मत की चिंता में मत रहो मुनइम, ज़िंदगी की कुछ तो बुनियाद है।

विस्तार

यह शेर हमें ज़िंदगी की नश्वरता और अस्थिरता का एहसास कराता है। शायर कहते हैं कि ज़िंदगी को किसी भी तरह से 'सेट' करने की या उसकी नींव मजबूत करने की बहुत फ़िक्र मत करो। क्योंकि, मेरे दोस्त.... ज़िंदगी की कोई पक्की बुनियाद ही नहीं होती! बस एक बहता हुआ एहसास है, एक सफ़र है।

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