पेश-ए-सआयत क्या जाए है हक़ है मेरी तरफ़ सो है मैं तो चुप बैठा हूँ यकसू गर कोई तक़रीर करो

“What is the use of offering help, it is my right, it is there I am sitting silent, if only someone makes a speech.”

— मीर तक़ी मीर
अर्थ

पेश-ए-सआयत का क्या जाए, है हक़ मेरी तरफ़ सो है। मैं तो चुप बैठा हूँ, यकसू गर कोई तक़रीर करो।

विस्तार

यह शेर उस शख़्स के मन की बात कहता है, जिसके पास हक़ है, लेकिन वो चुप रहना पसंद करता है। शायर कहते हैं कि मैं सभा में बैठा हूँ, और मेरा हक़ तो मेरी तरफ़ है... पर मैं कोई तकरार नहीं करता। मैं बस इंतज़ार कर रहा हूँ... कि कोई दूसरा अपनी बात शुरू करे। यह सिर्फ़ चुप्पी नहीं है, बल्कि एक गहरी रणनीति है, एक शांत आत्मविश्वास!

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