मौसम-ए-गुल आया है यारो कुछ मेरी तदबीर करो यानी साया-ए-सर्व-ओ-गुल में अब मुझ को ज़ंजीर करो

“O friends, has the season of roses arrived, make some arrangement for me; Or rather, in the shade of all flowers, now bind me with chains.”

— मीर तक़ी मीर
अर्थ

यारों, क्या गुलाब का मौसम आ गया है? मेरे लिए कोई व्यवस्था करो। या यूँ कहूँ कि, सभी फूलों की छाँव में अब मुझे जकड़ लो।

विस्तार

यह शेर प्रेम की एक गहरी उलझन को दर्शाता है। 'मौसम-ए-गुल' का मतलब है खुशियों का, सुंदरता का चरम। शायर यहां आज़ादी नहीं मांग रहे हैं, बल्कि कहते हैं कि इस खूबसूरती में हमें बांध दिया जाए! यह एक ऐसा समर्पण है, जहाँ आशिक़ को लगता है कि यह बंधन, यह कैद, ही सबसे बड़ी इबादत है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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