दैर ओ हरम से तू तो टुक गर्म-ए-नाज़ निकला — मीर तक़ी मीर

दैर ओ हरम से तू तो टुक गर्म-ए-नाज़ निकला हंगामा हो रहा है अब शैख़ ओ बरहमन में

“Oh, from the harem, you have emerged with such a spicy air of charm; a commotion is now rising among the scholars and the ascetics.”

— मीर तक़ी मीर

अर्थ

हे हरम से तुम तो इतना गरम नज़ाक का टुकड़ा लेकर निकले कि अब शैक और बरहमान में हंगामा हो रहा है।

विस्तार

यह शेर महबूब की अदा और उनके नज़ाकत भरे अंदाज़ के ज़बरदस्त असर को बयां करता है। शायर कहते हैं कि महबूब का दैर-ओ-हरम से निकलना ही काफी है, क्योंकि उनकी एक झलक ने पूरे माहौल को अस्त-व्यस्त कर दिया है। यह सिर्फ़ इश्क़ का हंगामा नहीं है, बल्कि यह दिखाता है कि एक नज़ाकत भरी अदा कैसे समाज के सारे नियम तोड़ सकती है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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