यूसुफ़ अज़ीज़-ए-दिल-हा जा मिस्र में हुआ था — मीर तक़ी मीर
“Yusuf, the beloved of the heart, went to Egypt, / The honor of pure gems is not in the homeland.”
अर्थ
शायर कह रहे हैं कि जिस तरह यूसुफ़ दिल के अज़ीज़ थे और मिस्र गए, उसी तरह पाक और अनमोल चीज़ों का सम्मान वतन में नहीं है।
विस्तार
मिर्ज़ा तक़ी मीर ने यहाँ एक बहुत ही दर्दनाक सच्चाई बयान की है। शायर कहते हैं कि जिस तरह यूसुफ़ को अपने दिल के महबूब ने मिस्र भेज दिया, उसी तरह हमारे वतन में पाकीज़े नगीनों की इज़्ज़त नहीं बची। यह शेर बताता है कि कोई चीज़ या इंसान सिर्फ़ जगह का मोहताज नहीं होता; उसकी क़ीमत और इज़्ज़त कहीं और भी होती है।
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