था नाज़ बहुत हम को दानिस्त पर अपनी भी
आख़िर वो बुरा निकला हम जिस को भला जाना
“We were too proud of our own knowledge of the Beloved, But ultimately, the one we thought was good turned out to be bad.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
हम अपनी दानिस्त पर बहुत नाज़ करते थे, पर आख़िर वो बुरा निकला जिसे हम भला समझते थे।
विस्तार
यह शेर हमें सिखाता है कि अपनी समझ या ज्ञान पर घमंड करना कितना खतरनाक हो सकता है। शायर कहते हैं कि मैं अपनी समझ पर बहुत घमंड करता था.... लेकिन ज़िंदगी ने मुझे यह अहसास कराया कि जिसे मैंने बुरा समझा था, वही असल में अच्छा निकला। यह एक गहरा सबक है—कि इंसान को किसी को भी आँकना नहीं चाहिए।
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