“Now, they are not found in the jungles, Perhaps the Hazrat-e-Khizra has passed away.”
अब कहीं जंगलों में हज़रत-ए-ख़िज़्र नहीं मिलते, शायद वे स्वर्ग सिधार गए हैं।
यह शेर केवल किसी व्यक्ति के खो जाने की बात नहीं करता, बल्कि एक पूरे दौर के खो जाने का एहसास कराता है। हज़रत-ए-ख़िज़्र एक रहस्यमयी और ज्ञान के प्रतीक माने जाते हैं। जब शायर पूछते हैं कि वे जंगलों में नहीं मिलते, तो वह सिर्फ एक व्यक्ति के बारे में सवाल नहीं कर रहे.... बल्कि वह उस समय के बारे में सवाल कर रहे हैं जब ऐसा गहरा ज्ञान मिलना मुमकिन था! यह एक गहरे नुकसान का दर्द है।
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