कुछ ख़बर होती तो न होती ख़बर सूफि़याँ बे-ख़बर गए शायद

“If there were any news, there would be no news, Perhaps the Sufis departed, unknowing.”

— मीर तक़ी मीर
अर्थ

अगर कोई खबर होती तो कोई खबर ही नहीं होती, शायद सूफी लोग बेखबर हो गए।

विस्तार

यह शेर ज्ञान और रहस्य के रिश्ते को समझाता है। शायर कहते हैं कि अगर कोई बात 'ख़बर' होती, तो वह ख़ुद ही एक सरप्राइज़ होती। लेकिन कुछ ऐसी सच्चाइयाँ होती हैं जो ख़बर से परे होती हैं। शायर यह सवाल उठा रहे हैं कि क्या सूफ़ियाँ, जो इल्म के शिखर पर थे, किसी ख़बर की ज़रूरत के बिना, बस अपने आप ग़ायब हो गए? यह ग़ायब होना एक तरह की आत्मिक शांति है।

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