तिश्ना-लब मर गए तिरे आशिक़ — मीर तक़ी मीर

तिश्ना-लब मर गए तिरे आशिक़ न मिली एक बूँद पानी की

“My lover's lips have died of thirst, O beloved, For not even a drop of water was found.”

— मीर तक़ी मीर

अर्थ

मेरे प्यासे होंठ तेरे आशिक़ मर गए, ऐ प्रिय, क्योंकि पानी की एक बूँद भी नहीं मिली।

विस्तार

यह शेर उस गहरे दर्द को बयान करता है जो तड़प और इंतज़ार से होता है। मिर्ज़ा तक़ी मीर ने प्यास को एक रूपक (metaphor) बनाया है। यहाँ 'पानी की एक बूँद' का न मिलना, महबूब की बेरुखी से उपजे भावनात्मक खालीपन को दर्शाता है। यह आशिक़ की उस हालत को बयां करता है, जहाँ तड़प इतनी ज़्यादा है कि ज़िन्दगी जैसे थम गई है। यह प्रेम की सबसे बड़ी पीड़ा है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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