सद रंग जल्वा-गर है हर जादा ग़ैरत गुल — मीर तक़ी मीर

सद रंग जल्वा-गर है हर जादा ग़ैरत गुल 'आशिक़ की एक पावे क्यूँ कर क़रार ख़्वाहिश

“Every beloved bloom, a dazzling spectacle, but why does the lover's foot find rest on a single whim?”

— मीर तक़ी मीर

अर्थ

हर फूल अपनी चमक से मन मोह लेता है, फिर भी प्रेमी की इच्छा किसी एक बात पर क्यों ठहर जाती है।

विस्तार

यह शेर इश्क़ की उस बे-तस्ल्ली और बहुत बड़े दायरे की बात करता है। शायर कहते हैं कि हर फूल... हर चीज़ में कितने रंग और कितने नज़ारे छिपे हैं। लेकिन एक आशिक़ के लिए... अपनी चाहत को सिर्फ़ एक जगह, एक ही जगह पर क़रार करना... यह मुमकिन नहीं है। इश्क़ का दायरा इतना बड़ा है!

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