हम मेहर ओ रज़ क्यूँ कर ख़ाली हों आरज़ू से — मीर तक़ी मीर

हम मेहर ओ रज़ क्यूँ कर ख़ाली हों आरज़ू से शेवा यही तमन्ना फ़न ओ शि'आर ख़्वाहिश

“Why should we empty our desires of such grace and secret? / My only yearning is for the desire of art and poetry.”

— मीर तक़ी मीर

अर्थ

हे मेहर और रज़, क्यों खाली करें आरज़ू से? शेवा, यही तमन्ना फ़न और शि'आर ख़्वाहिश।

विस्तार

यह शेर बहुत गहरे एहसास को बयां करता है। शायर पूछ रहे हैं कि हम अपनी आरज़ू से, अपने प्यार और रहस्यों को, क्यों खाली करें? उनका कहना है कि हमारी एकमात्र तमन्ना (wish) तो फ़न और शायरी की ख़्वाहिश है। यह शेर बताता है कि कला और कविता के प्रति जो चाहत होती है, वह इतनी गहरी होती है कि उसे कभी मिटाना नहीं चाहिए। यह एक कला प्रेमी की आत्मा की आवाज़ है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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