ग़ैरत से दोस्ती की किस किस से होजे दुश्मन — मीर तक़ी मीर
ग़ैरत से दोस्ती की किस किस से होजे दुश्मन
रखता है यारी ही की सारा दयार ख़्वाहिश
“From whom, driven by honor, can friendship turn to enmity? / For keeping the whole abode of affection and desire, only friendship remains.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
ग़रत से दोस्ती की किस-किस से हो जाए दुश्मन। रखता है यारी ही की सारा दयार ख़्वाहिश।
विस्तार
यह शेर दोस्ती की उस अटूट डोर को बयान करता है, जो हर हाल में साथ निभाती है। शायर कहते हैं कि ग़ैरत से दोस्ती को दुश्मन बनाना नामुमकिन है। असल में, यह दुनिया, यह सारा जहान, बस यारी की ख्वाहिश रखता है। यह शेर बताता है कि सच्चा रिश्ता कितना पाक और मजबूत होता है, जिसे कोई तोड़ नहीं सकता।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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