हालाँकि 'उम्र सारी मायूस गुज़री तिस पर — मीर तक़ी मीर
हालाँकि 'उम्र सारी मायूस गुज़री तिस पर
क्या क्या रखें हैं उस के उम्मीद-वार ख़्वाहिश
“Though all my life has passed in despair, what hopes and wishes should I hold?”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
भले ही मेरा पूरा जीवन निराशा में बीत गया हो, फिर भी मैं उसके लिए क्या उम्मीदें और इच्छाएँ रखूँ?
विस्तार
यह शेर दिल टूटने और उम्मीदों के टूटने के दर्द को बयां करता है। शायर जी कह रहे हैं कि मैंने अपनी पूरी ज़िंदगी एक उम्मीद के सहारे गुज़ार दी.... लेकिन जब वो उम्मीदें भी बिखर गईं, तो अब और क्या बचा? यह एक गहरा सन्नाटा है.... एक ऐसा एहसास जब आप हार मान लेते हैं, और समझते हैं कि शायद कुछ चीज़ें सिर्फ़ 'बस हो गया' कहने के लिए थीं।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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