ने कुछ गुनह है दिल का ने जुर्म-ए-चश्म इस में — मीर तक़ी मीर

ने कुछ गुनह है दिल का ने जुर्म-ए-चश्म इस में रखती है हम को इतना बे-इख़्तियार ख़्वाहिश

“Whether it is some fault of the heart, or the sin of the eyes, this desire holds us so helplessly captive.”

— मीर तक़ी मीर

अर्थ

क्या यह दिल का कोई गुनाह है या आँखों का कोई पाप, इस इच्छा में हमें इतना बेबस रखती है।

विस्तार

यह शेर उस प्रेम की बात करता है, जो न सिर्फ़ गहरा है, बल्कि थोड़ा गुनाहगार भी है। शायर कहते हैं कि न सिर्फ़ दिल में कोई गुनह है, बल्कि आपकी निगाहों में भी एक जुर्म है। और यही जुर्म... हमें एक ऐसे बे-इख़्तियार ख़्वाहिश में फँसाए रखता है, जहाँ हम अपनी मर्ज़ी के मालिक नहीं रह पाते।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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