ले हाथ में क़फ़स टुक सय्याद चल चमन तक — मीर तक़ी मीर
“With a cage in hand, like Sayyad wandering in the garden, We too have yearned for the stroll of spring for a long time.”
अर्थ
हाथ में पिंजरा लेकर, जैसे सैयद बगीचे में टहल रहा हो, हमें भी बहुत समय से बसंत की सैर की इच्छा है।
विस्तार
यह शेर सिर्फ़ सैर-ए-बहार की बात नहीं करता, बल्कि रूह की तड़प को बयान करता है। शायर कहते हैं कि मन में एक बेचैनी है, एक ख़्वाहिश है कि बस एक बार वो बहार का नज़ारा देखा जाए। क़फ़स का ज़िक्र यहाँ किसी क़ैद या बंधे हुए एहसास का प्रतीक है, जिसे आज़ाद करना ज़रूरी है। यह एक बहुत ही गहरा और भावनात्मक एहसास है।
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