गौहर-ए-गोश किसू का नहीं जी से जाता
आँसू मोती से मिरे मुँह पे ढले जाते हैं
“The nectar of my heart is not shed by my soul, My tears fall upon my face like pearls.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
मेरे हृदय का अमृत मेरे प्राणों से नहीं निकलता, बल्कि मेरे आँसू मोतियों की तरह मेरे मुख पर गिरते हैं।
विस्तार
यह शेर उस गहरे एहसास की बात करता है, जिसे हम रोक नहीं पाते। शायर कह रहे हैं कि आँखों का मोती, यानी आँसू, दिल की मर्ज़ी के खिलाफ नहीं जाते। वे तो बस मोती की तरह, अपने आप ही हमारे चेहरे पर ढल जाते हैं। यह उस दर्द या मोहब्बत का इज़हार है, जिसे हम शब्दों में नहीं, बल्कि आँसुओं से बयां करते हैं।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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