क्या कहें आतिश-ए-हिज्राँ से गले जाते हैं
छातियाँ सुलगें हैं ऐसी कि जले जाते हैं
“What can I say, I go embracing the fire of separation, My chests are so burning that they feel like they are consumed.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
क्या कहें, मैं विरह की अग्नि से गले लगता हूँ, ऐसी कि मेरी छातियाँ जलने लगती हैं।
विस्तार
यह शेर बिछड़ने के दर्द को बयां करता है। शायर कह रहे हैं कि ये हिज्र की आँच इतनी तेज़ है कि वो खुद उस आग में गले लगने को तैयार हैं। उनकी छातियाँ बस सुलग नहीं रही हैं, बल्कि ऐसी जल रही हैं कि पूरी तरह से राख हो जाने का एहसास है। यह इश्क़ के उस दर्द का ज़िक्र है, जहाँ दर्द ही इबादत बन जाता है।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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