पाँव रुकता नहीं मस्जिद से दम-ए-आख़िर भी — मीर तक़ी मीर

पाँव रुकता नहीं मस्जिद से दम-ए-आख़िर भी मरने पर आया है पर लात चली जाती है

“The foot does not stop, even from the final breath of the mosque, It has come to die, but it keeps kicking away.”

— मीर तक़ी मीर

अर्थ

पाँव मस्जिद से अंतिम साँस तक नहीं रुकता; मरने के लिए आया है, पर लात मारता रहता है।

विस्तार

यह शेर मिर्ज़ा तक़ी मीर ने जीवन के संघर्ष की निरंतरता पर बात की है। इसका मतलब है कि जब आत्मा को आख़िर में जाना होता है, तब भी शरीर को रुकने नहीं देता। पैर, मानो किसी को जवाब देना चाहते हों, मस्जिद जैसी पवित्र जगह पर भी, मौत के वक़्त तक हिलते रहते हैं। यह जीवन के इस गहरे सत्य पर एक चिंतन है कि संघर्ष मृत्यु के साथ भी रुकता नहीं है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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