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एक हम ही से तफ़ावुत है सुलूकों में 'मीर' यूँ तो औरों की मुदारात चली जाती है

In my ways of conduct, I am the only one who differs, O Meer, For the flaws of others are simply passed by.

मीर तक़ी मीर
अर्थ

शायर कहता है कि मेरे आचरण में मैं ही अलग हूँ, क्योंकि दूसरों की कमियाँ बस बीत जाती हैं।

विस्तार

यह शेर एक बहुत गहरी आत्म-चिंतन की बात करता है। शायर कहते हैं कि मेरे सुलूकों में एक तफ़ावुत है। इसका मतलब है कि मेरे व्यवहार या मेरी तकलीफों को लोग अलग तरह से देखते हैं। वह कहते हैं कि दूसरों की गलतियां या कमियां तो बस नज़रअंदाज़ कर दी जाती हैं.... लेकिन मेरी जो बात है, वह अलग है! यह शायर के अकेलेपन और अपनी पहचान को लेकर एक गहरा दर्द है।

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