टुक तो वक़्फ़ा भी कर ऐ गर्दिश-ए-दौराँ कि ये जान
उम्र के हैफ़ ही क्या सात चली जाती है
“O, even the stopping of the journey, O path of life, that this life What is the age, how can it last for seven years?”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
हे जीवन के पथ, थोड़ा तो रुक भी जा ऐ गर्दिश-ए-दौराँ, कि ये जान उम्र के हैफ़ क्या सात चली जाती है।
विस्तार
यह शेर ज़िंदगी की भाग-दौड़ और वक़्त की नश्वरता को दिखाता है। शायर यहाँ उस जीवन चक्र से गुहार लगा रहे हैं जो कभी रुकता नहीं। वह कहते हैं कि यह ज़िन्दगी, जो अपने आप में इतनी बड़ी है, क्या सच में सात दिन तक चल पाएगी? यह एक गहरा एहसास है कि हमारी ज़िन्दगी कितनी छोटी है, और ये दुनियावी तमाशे कितने भारी हैं।
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