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रह गए गाह तबस्सुम पे गहे बात ही पर बारे हम-नशीं औक़ात चली जाती है

When the laughter remained on the lips, the conversation was still incomplete, Oh my beloved, the moments keep passing by.

मीर तक़ी मीर
अर्थ

जब हँसी होंठों पर रह गई, तो बात अधूरी रह गई, ऐ हम-नशीं, वक़्त गुज़रता चला जाता है।

विस्तार

यह शेर हमें वक़्त की नश्वरता और लम्हों के गुज़र जाने के एहसास से रूबरू कराता है। शायर कह रहे हैं कि हमारी बातें, हमारे तबस्सुम पर अटक गई हैं.... लेकिन ऐ हम-नशीं, वक़्त तो चलता जा रहा है। यह एक दिल को छू लेने वाली बात है, जो बताती है कि चाहे रिश्ता कितना भी गहरा क्यों न हो, वक़्त किसी का इंतज़ार नहीं करता।

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