जिस मरज़ में कि जान जाती है — मीर तक़ी मीर
जिस मरज़ में कि जान जाती है
दिलबरों ही की वो जुदाई है
“The separation from the beloved, in which one's life departs,”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
जिस बीमारी में जान चली जाती है, वो प्रियतम से बिछड़ना है।
विस्तार
यह शेर, बिछड़ने के दर्द को बयां करता है। मिर्ज़ा तक़ी मीर कहते हैं कि जीवन को लील लेने वाला कोई रोग नहीं है.... बल्कि वह रोग तो महबूब से बिछड़ जाने का है। यह जुदाई को एक जानलेवा बीमारी का रूप देते हैं। इसका मतलब है कि दिल का टूटना, किसी भी शारीरिक दर्द से कहीं ज़्यादा तकलीफदेह और घातक होता है।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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