निशाँ अश्क-ए-ख़ूनीं के उड़ते चले हैं — मीर तक़ी मीर
निशाँ अश्क-ए-ख़ूनीं के उड़ते चले हैं
ख़िज़ाँ हो चली है बहार-ए-गरेबाँ
“The tracks of bloody tears have flown away, Autumn has arrived where spring was once stranger.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
खून के आँसुओं के निशान उड़ते चले गए हैं, और जहाँ कभी बहार थी, वहाँ अब पतझड़ आ गया है।
विस्तार
यह शेर समय के साथ गुज़रते दर्द और टूटे सपनों को बयान करता है। शायर ने एक ऐसी स्थिति का वर्णन किया है जहाँ 'बहार' (खुशी) पर 'ख़िज़ाँ' (उदासी) का साया छा गया है। 'गरेबाँ की बहार' यानी एक ऐसे मन की खुशी जो कहीं और नहीं मिल पाती। और ये 'अश्क़-ए-ख़ूनी' सिर्फ़ आँसू नहीं हैं, ये दिल के ज़ख्म हैं, जो हर लम्हे को खून से रंग देते हैं।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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