वो तो नहीं इक छींटा रोने का हुआ गाहे अब दीदा-ए-तर अक्सर दरिया से उबलते हैं

“It wasn't just a mere sprinkle of tears, but Now the sight of the beloved often boils like a river.”

— मीर तक़ी मीर
अर्थ

वो तो नहीं बस आँसू की बूँद थी, पर अब महबूब का नज़ारा अक्सर नदी की तरह उबलता है।

विस्तार

यह शेर ग़म की उस गहराई को बयान करता है, जहाँ आँसू बस टपकना नहीं रह जाते। शायर कहते हैं कि यह महज़ एक छींटा नहीं है; अब ये आँसू तो दरिया की तरह उबल रहे हैं। इसका मतलब है कि दिल का दर्द इतना गहरा हो चुका है कि वह लगातार, रुकने का नाम नहीं ले रहा। यह एक ऐसे ग़म की बात है जो पूरे अस्तित्व को डुबो देता है।

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