बैठना ग़ैरों में कब है नंग-ए-यार — मीर तक़ी मीर
“When is it for me to sit among strangers, exposed like a beloved? / Flowers and blossoms are always among thorns.”
अर्थ
ग़ैरों में बैठना कब है नंग-ए-यार, फूल गुल होते ही हैं ख़ारों के बीच। (अर्थात, प्रियतम के सामने कब बैठना है, जब फूल-पत्तियां हमेशा काँटों के बीच ही होते हैं।)
विस्तार
यह शेर बहुत गहरे एहसास को बयां करता है। शायर पूछते हैं कि क्या कभी ग़ैरों के बीच खुद को बेपरवाह किया जा सकता है? इसका जवाब है कि जीवन ऐसा ही है—जहाँ फूल खिलते हैं, वहीं काँटे भी होते हैं। यह बताता है कि खूबसूरती के साथ हमेशा कोई ख़तरा जुड़ा होता है। हमें अपने इश्क़ और अपनी हस्ती दोनों में इस ख़तरे को स्वीकार करना पड़ता है।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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