उस के आतिशनाक रुख़्सारों बग़ैर — मीर तक़ी मीर

उस के आतिशनाक रुख़्सारों बग़ैर लोटिए यूँ कब तक अँगारों के बीच

“Without his fiery countenance, How long can you wander amidst the embers?”

— मीर तक़ी मीर

अर्थ

उसके आतिशनाक मुखड़ों के बिना, तुम अँगारों के बीच कब तक घूम सकती हो?

विस्तार

यह शेर महान शायर मिर्ज़ा तक़ी मीर का है, जो बिछड़ने के दर्द को बयां करता है। शायर पूछते हैं, 'उसके आतिशनाक रुख़्सारों बग़ैर... आप कब तक अंगारों के बीच भटकते रहेंगे?' यह पंक्तियाँ बताती हैं कि महबूब की उपस्थिति के बिना जीवन कैसा असहनीय होता है। मिर्ज़ा कहते हैं कि महबूब का नज़ारा न होना, किसी भी शारीरिक कष्ट से कहीं ज़्यादा पीड़ादायक है।

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