ग़र्क़ आब-ए-अश्क से हूँ लेक उड़ा जाता हूँ — मीर तक़ी मीर
ग़र्क़ आब-ए-अश्क से हूँ लेक उड़ा जाता हूँ
जूँ समक गो कि मिरे डूबे हैं पर पानी में
“I am carried away by the water of tears, Like a bird whose companions are drowned in the water.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
मैं आँसुओं के पानी से एक झील की तरह उड़ जाता हूँ, जैसे एक पक्षी जिसके साथी पानी में डूबे हैं।
विस्तार
यह शेर गहरे दर्द और विरह की स्थिति को बयां करता है। शायर कहते हैं कि उनके आँसू इतने तेज़ हैं कि वे उन्हें बहा ले जाते हैं, जैसे कोई मछली पानी में डूबी होती है। यह एक बहुत ही ख़ूबसूरत तश्बीह है, जो बताती है कि ग़म इतना गहरा है कि वह ख़ुद ही एक जाल बन जाता है। यह दिल के सबसे अकेले और उदास पलों का एहसास कराता है।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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