हर ज़ख़्म-ए-जिगर दावर-ए-महशर से हमारा
इंसाफ़-तलब है तिरी बेदाद-गरी का
“Every wound of the heart demands justice from the Day of Judgment for your heedlessness.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
हर दिल का ज़ख्म महशर के दिन से न्याय की मांग करता है, तुम्हारी बेपरवाही के लिए।
विस्तार
यह शेर महज़ इश्क़ का दर्द नहीं है, बल्कि एक इल्ज़ाम है! शायर कहते हैं कि महबूब की बेदागी से जो ज़ख़्म लगे हैं, वो इतने गहरे हैं कि उन्हें आख़िरत में भी इंसाफ़ चाहिए। हर ज़ख़्म.... दावर-ए-महशर से हिसाब माँग रहा है! इसका मतलब है कि यह दर्द इतना बड़ा है कि इसे सिर्फ़ वक़्त नहीं, बल्कि क़यामत का हिसाब चाहिए!
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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