शर्मिंदा तिरे रुख़ से है रुख़्सार परी का चलता नहीं कुछ आगे तिरे कब्क-ए-दरी का

“From your countenance, the maiden's blush is ashamed, And from your waist-belt, nothing can advance.”

— मीर तक़ी मीर
अर्थ

तुम्हारे मुख से परियों की गालों की लाली शर्मिंदा है, और तुम्हारी कमर-पटिया से कुछ भी आगे नहीं बढ़ सकता।

विस्तार

यह शेर महबूब की बेमिसाल तारीफ़ है। शायर कहते हैं कि नज़ारा इतना हसीन है कि एक परियों के रुख़्सार भी शर्मिंदा हैं। वह महबूब के क़रीब इतनी खोई हुई हैं कि वह एक कदम भी आगे नहीं बढ़ सकतीं। यह शेर महबूब के कायल कर देने वाले जादू को बयां करता है।

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शर्मिंदा तिरे रुख़ से है रुख़्सार परी का | Sukhan AI