जिस सर को ग़ुरूर आज है याँ ताज-वरी का कल उस पे यहीं शोर है फिर नौहागरी का

“Whose head today bears the pride of a crown, Tomorrow the same spot will echo with the lament of sorrow.”

— मीर तक़ी मीर
अर्थ

जिस सिर पर आज घमंड या ताज-पहनने का गर्व है, कल उसी जगह फिर मातम और विलाप का शोर होगा।

विस्तार

यह शेर मिर्ज़ा तक़ी मीर की ज़िंदगी की सच्चाई है। शायर कहते हैं कि जिस सर पर आज घमंड का ताज सजा है, जो आज खुद को बहुत ऊँचा समझता है... कल उसी सर के आस-पास नौहा (शोक) का शोर होगा। यह हमें याद दिलाता है कि दुनियावी शान-ओ-शौकत कितनी क्षणभंगुर होती है। घमंड का अंजाम हमेशा निराशा होती है।

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