ले साँस भी आहिस्ता कि नाज़ुक है बहुत काम आफ़ाक़ की इस कारगह-ए-शीशागरी का

“Let even the breath come gently, for this craft of poetry, this stage of horizons, is very delicate.”

— मीर तक़ी मीर
अर्थ

साँस भी धीरे ले, क्योंकि आफ़ाक़ की इस शायरी की कार्यशाला बहुत नाज़ुक है।

विस्तार

यह शेर सिर्फ शायरी की बात नहीं करता, बल्कि जीवन की नाज़ुकता को बयां करता है। शायर कहते हैं कि साँस भी आहिस्ता ले लो, क्योंकि यह जीवन का काम, यह अस्तित्व का काम... बहुत ही नाज़ुक है। यह हमें सिखाता है कि ज़िंदगी को जल्दबाजी में नहीं जीना चाहिए। हर पल को इत्मीनान से, बहुत ख़्याल से जीना चाहिए, वरना सब कुछ बिखर जाएगा।

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