टुक 'मीर'-ए-जिगर-सोख़्ता की जल्द ख़बर ले
क्या यार भरोसा है चराग़-ए-सहरी का
“Tuk 'Mir'-e-Zigar-sokhta, bring soon news to me, What faith is there in the lamp of the morning's glow?”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
टुक 'मीर'-ए-जिगर-सोख़्ता, मेरी जल्द ख़बर लाओ, क्या यार सुबह की रोशनी के दीये पर भरोसा है।
विस्तार
यह शेर टूटी हुई उम्मीदों का दर्द बयान करता है। मीर तक़ी मीर कह रहे हैं कि दिल का ज़ख़्म, जो जल रहा है, वह एक सच्चाई है, इससे कोई नहीं बच सकता। वो 'सुबह के दीये' (चराग़-ए-सहरी) पर भरोसा करने को शक की नज़र से देखते हैं। शायर कहते हैं कि जब दर्द इतना गहरा हो, तो सुबह की पहली किरण भी एक धोखा लगती है।
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